पितृ अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी।

 

समर इंडिया।धर्मवीर निगम।
ऊंचागांव।संवाददाता।

बुलन्दशहर।
ऊंचागांव। क्षेत्र में स्थित मानव ऋषि के आश्रम गंगा घाट के समीप बह रही गंगा के पवित्र धारा में पितृ अमावस्या पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई पितृ अमावस्या का हिंदू धर्म में काफी महत्व माना जाता है। कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि मैंने अमावस्या का महत्व माना गया है ईद तो प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को प्रदान किया जा सकता है लेकिन अश्विन अमावस से विशेष रूप से शुभ फलदाई मानी जाती है पित्र अमावस्या होने के कारण इसे पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है आश्विन मास के कृष्ण पक्ष का संबंध पितरों से होता है इस मास की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या कहा जाता है इस दिन धरती पर आए हुए पितरों को याद करके उनकी विदाई की जाती है

 

अगर पूरे पित्र पक्ष में अपने पुत्रों को याद न किया गया हो तो केवल अमावस्या को उन्हें याद करके दान करने से और निर्धनों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है इस दिन दान करने का फल होता है। इन राहु से संबंधित बाधाओं से मुक्ति पाई जा सकती है इस बार पितृ विसर्जन अमावस्या 25 सितंबर को मनाई गई। इस दिन श्राद्ध करने के पितृगण प्रसन्न होकर अपने परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध करने से भोजन पितरोंको स्वथा रूप में मिलता है यानी पितरों को अर्पित किया गया भोजन उस रूप में परिवर्तित हो जाता है जिस रूप में उनका जन्म हुआ होता है अगर मनुष्य योनि में हो तो अन्न रूप में उन्हें भोजन मिलता है पशु योनि में घास के रूप में नारियों ने में वायु रूप रूप में और यक्ष योनि में पान के रूप में भोजन पहुंचाया जाता है

 

 

इस दिन ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले दक्षिण की ओर मुख करके पंचवली गाय कुत्ते और देवता दी और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर रखकर अर्पित किया जाता है। पितृ अमावस्या का हिंदू धर्म में काफी महत्व माना गया है इस दिन सभी हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों को याद कर भोग लगाया जाता है। ऊंचागांव क्षेत्र में स्थित मांडव ऋषि आश्रम गंगा तट के किनारे निकल रही गंगा की पावन धारा में रविवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई और सुख शांति समृद्धि अमन चैन की मन्नत मांगी। यह क्षेत्र काफी विख्यात है यहां बड़े-बड़े ऋषि मुनि तपस्वी रहे हैं। जिसे इस भूमि को एक तपोभूमि के नाम से भी जाना जाता है।रविवार की सुबह को मांडव ऋषि आश्रम गंगा घाट के तट पर वह राही गंगा की पावन धारा में स्नान करने के लिए हजारों से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं की लाइन लग गई यहाँ काफी दूर-दूर से श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए आते है।

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