Badaun police-किसान के आत्मघाती कदम उठाने के मामले में सबसे ज्यादा तत्कालीन चौकी इंचार्ज अशोक कुमार को ही दोषी माना जा रहा

किसान के आत्मघाती कदम उठाने के मामले में सबसे ज्यादा तत्कालीन चौकी इंचार्ज अशोक कुमार को ही दोषी माना जा रहा

चौकी इंचार्ज ने ही किसान के बेटों पर करा दी थी रिपोर्ट।
किसान के आत्मघाती कदम उठाने के मामले में सबसे ज्यादा तत्कालीन चौकी इंचार्ज अशोक कुमार को ही दोषी माना जा रहा है।

जयकिशन सैनी
समर इंडिया (बदायूँ)
बदायूं। एसएसपी कार्यालय में किसान के आत्मघाती कदम उठाने के मामले में सबसे ज्यादा तत्कालीन चौकी इंचार्ज अशोक कुमार को दोषी माना जा रहा है। दरअसल, पुलिस ने क्रॉस केस बनाने के लिए किसान के परिवार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली थी, जिससे उसे लग रहा था कि पुलिस उसके साथ न्याय नहीं करेगी। वह आरोपियों से मिल गई है और लगातार उसका ही उत्पीड़न किया जा रहा है। ऐसे में उसने आत्मघाती कदम उठाया। 

 

 

सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव दौरी रसूलपुर निवासी किशनपाल के आठ बीघा खेत में 23 अप्रैल को आग लग गई थी। उस दिन किशनपाल ने अपनी फसल काटकर एकत्र की थी। वह गेहूं निकाल पाता, इससे पहले फसल जलकर राख हो गई। इसमें उसका करीब 90 हजार रुपये का नुकसान हुआ था। इसके दूसरे दिन किशनपाल अपने घर के दरवाजे पर खड़ा था तभी आरोपी रामऔतार और रामेश्वर ने उसकी मजाक बनाई। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की। इस पर किशनपाल ने रामऔतार, रामेश्वर, ओमेंद्र, रामेंद्र, श्रीराम, विवेक, ओमवीर और देवेंद्र के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने के आरोप में 25 अप्रैल को एफआईआर दर्ज कराई थी।

 

 

 

इनमें रामऔतार सहसवान में सफाई कर्मचारी है तो रामेश्वर बीमा एजेंट, वह खुद को बीजेपी नेता भी बताता है। इससे पुलिस भी आरोपियों की ओर झुक गई। किशनपाल के बेटे अमरजीत के मुताबिक तत्कालीन चौकी इंचार्ज अशोक कुमार आरोपियों से मिल गया था। इससे उन्हें चौकी बुलाकर हड़काया गया और थप्पड़ भी मारे गए। 26 अप्रैल को चौकी इंचार्ज अशोक कुमार ने आरोपी रामेंद्र की तहरीर पर किशनपाल, बेटे अमरजीत, ओमप्रकाश और पत्नी सीमा के खिलाफ भी मामला दर्ज करा दिया। इसके बावजूद किशनपाल ने आईजीआरएस पर शिकायत की लेकिन वर्तमान चौकी इंचार्ज राहुल पुंडीर ने उनके पक्ष में रिपोर्ट नहीं लगाई। सिपाही भी तत्कालीन चौकी इंचार्ज का कहना मान रहा था। हालांकि इंस्पेक्टर राजकुमार तिवारी ने जरूर जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

 

—————————————————————————————————-
सीओ सिटी ने की थी गेहूं में आग लगने की जांच
एसएसपी के मुताबिक जब पुलिस को गेहूं में आग लगने और आरोप लगाने की सूचना मिली थी तो सीओ सिटी आलोक मिश्रा को मौके पर भेजा गया था। उन्होंने इसकी जांच की थी। उस दिन दौरी गांव में एक बरात आई थी। अनुमान लगाया जा रहा था कि आतिशबाजी की चिंगारी से गेहूं में आग लग गई थी। इसमें आग लगाने की पुष्टि नहीं हुई थी। इससे केवल मारपीट के मामले को गंभीरता से लिया जा रहा था।

—————————————————————————————————
किसान अपने घर से पेट्रोल डालकर आया था। उसने कार्यालय में घुसते ही माचिस जलाकर आग लगा ली। उसकी पत्नी ने बताया कि 23 अप्रैल को उसके गेहूं में आग लगा दी गई थी। उसने जिन पर शक जाहिर किया था, उनसे मारपीट हुई थी। इसमें दोनों ओर से मामला दर्ज है। इसमें इंस्पेक्टर, पूर्व और वर्तमान चौकी इंचार्ज व दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। एक टीम गठित कर मामले की जांच कराई जा रही है।
– डॉ. ओपी सिंह, एसएसपी

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!
E-Paper