इसमें कोई शक नहीं कि कमाल खान (1960-2022) एक उच्च कोटि के पत्रकार थे

एनडीटीवी के निर्विवादित पत्रकार कमाल खान नहीं रहे । आज सुबह से सोशल मीडिया पर यही शोक समाचार वायरल हो रहा है । फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप,मैसेंजर, कू,टेलीग्राम सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केवल यही खबर प्रचारित और प्रसारित हो रही है । इसमें कोई शक नहीं कि कमाल खान (1960-2022) एक उच्च कोटि के पत्रकार थे । निर्भीक, निर्विवादित, निष्पक्ष एवं निस्वार्थ । आज के पत्रकारिता के गिरते हुए स्तर को देखते हुए यह कहना मजबूरी है कि कोई दूसरा कमाल खान वर्तमान परिदृश्य पर नजर नहीं आता । और कोई और पत्रकार उनकी कमी पूरी कर पाएगा,यह भी नामुमकिन ही लगता है । उनकी दिलकश आवाज,उनका आकर्षक अंदाज,उनके शब्द सब आज कानों में सुनाई दे रहे हैं ।
लेकिन भविष्य में वह आवाज़ वह अंदाज देखने और सुनने को नहीं मिलेगा । उन्हें किसी विशेष नेता अथवा प्रतिनिधि अथवा किसी राजनीतिक पार्टी से न तो हमदर्दी थी और ना ही किसी भी पार्टी से किसी तरह की नाराजगी । वह जनता तक सच्चाई पहुंचाने का भरपूर प्रयास करते थे । उन्होंने खुद भी नहीं सोचा होगा कि कल रात का कार्यक्रम उनके जीवन का अंतिम कार्यक्रम सिद्ध होगा । सारा देश रवीश कुमार के इस बयान से इत्तफाक करता है कि, फिर कोई कमाल खान नहीं होगा भारत की

पत्रकारिता तहज़ीब से वीरान हो गई है । वह लखनऊ आज खाली हो गया जिसकी आवाज कमाल खान के शब्दों से खनकती थी । अलविदा कमाल सर । पत्रकारिता में अगर तहजीब की बात की जाए तो वह उन शीर्ष दो चार पत्रकारों में खास थे, जो अपने कार्यक्रमों में कभी तहज़ीब का दामन नहीं छोड़ते थे । और उनकी यही शैली सब को दीवाना बनाती थी । मुख्यमंत्री से लेकर विधायक गण,प्रशंसकों से लेकर आम आदमी हर कोई कमाल खान की मौत पर दुख व्यक्त कर रहा है । बकौल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पत्रकारिता के लिए यह अपूरणीय क्षति है । कमाल चौथे स्तंभ और निष्पक्ष पत्रकारिता के मजबूत प्रहरी थे ।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती,राहुल गांधी,प्रियंका गांधी,सचिन पायलट,मुख्तार अब्बास नकवी केंद्रीय मंत्री तथा उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा, स्वतंत्र देव सिंह,आचार्य प्रमोद कृष्णम,डॉ कुमार विश्वास,नगमा सहर,अलका लांबा सहित अनेकों नेताओं ने कमाल खान की असामयिक मौत पर दुख व्यक्त करते हुए अपनी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है । वही अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना बेहद दुखद है । वह पत्रकारिता की एक एक गंभीर आवाज बनकर उभरे । उनके सच की गहरी आवाज हमेशा बनी रहेगी । वहीं पत्रकारों का कहना है कि उनका निधन बेहद कष्टप्रद है उनका ना रहना पत्रकारिता जगत के लिए बहुत क्षति है ।

खबर पेश करने का उनका अंदाज पत्रकारों को प्रेरित करता है । और उनका आकर्षक अंदाज पत्रकारों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा । उनकी मौत का सदमा उनके प्रशंसकों के साथ साथ उनके विरोधियों को भी है । हम सारे देश की ओर से उस बेबाक अंदाज,को उस निर्भीक आवाज को,पत्रकारिता में तहज़ीब के शहंशाह को,उस महान पत्रकार कमाल खान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । मैं भी अपने शब्दों में उस महान पत्रकार को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं,दिल डूबा है आंखें हैं नम और ज़ुबां खामोश हुई । जाने वाले याद में तेरी दुनिया ये खामोश हुई ।। लिखने वाले पढ़ने वाले बोलने वाले गुमसुम हैं । सारा जहां खामोश हुआ है किस की सदा खामोश हुई ।। चंदा सूरज तारे चुप हैं धूप उजाले ग़मगीं हैं । गंगा जमुना सारे चुप हैं और हवा खामोश हुई ।। मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे में जिसको मुजाहिद ढूंढ रहा । उसकी धड़कन उसकी सांसें और सदा खामोश हुई ।।
मुजाहिद चौधरी एडवोकेट
स्तंभ लेखक,विश्लेषक,कवि,
हसनपुर, अमरोहा

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