पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 52 प्रतिशत की कमी आई

चालू वर्ष की इस अवधि में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 52 प्रतिशत की कमी आई

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ फ्रेमवर्क और कार्य योजना के सख्त कार्यान्वयन के लिए गहन प्रयास कर रहा है

सीएक्यूएम इस धान कटाई के मौसम के दौरान यानी 15 सितंबर से एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी कर रहा है

प्रवर्तन एजेंसियों ने अब तक पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में कुल सूचित साइटों में से 8,575 का निरीक्षण किया है और अब तक लगभग 58,05,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा (ईसी) लगाया गया

SAMAR INDIA AMAN KUMA SIDDHU

पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने और कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की थी और उसके अनुसार पंजाब सरकार, एनसीआर राज्य सरकारों और दिल्ली सरकार द्वारा कार्य योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है।

वर्तमान धान कटाई के मौसम के दौरान, एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) पिछले डेढ़ महीने से यानी 15 सितंबर 2021 से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के एनसीआर जिलों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पराली (धान अवशेष) जलाने की घटनाओं की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है।

राज्य सरकारों, विभागों और विभिन्न अन्य हितधारकों द्वारा सीआरएम मशीनरी, पूसा जैव-

अपघटक के उपयोग के माध्यम से फसल अवशेषों के बेहतर स्वस्थानी प्रबंधन और धान के भूसे के बाहरी उपयोग के लिए विभिन्न विकल्पों की सुविधा प्रदान करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा बड़े पैमाने पर  सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियां, शैक्षिक अभियान, जागरूकता शिविर चलाए जा रहे हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार किया जा रहा है।

पूर्ववर्ती रिपोर्ट के परिणामस्वरूप और आयोग के लिए इसरो द्वारा तैयार किए गए प्रोटोकॉल पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर जिलों और दिल्ली एनसीटी में 2021 में 15 सितंबर से 02 नवंबर की अवधि के दौरान पराली

जलाने की कुल 21,364 घटनाएं हुईं, जबकि 2020 में पराली जलाने की 43,918 घटनाएं हुई थीं। यानी पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में पराली जलाने की घटनाओं में 51.35% की कमी आई है।

पिछले एक सप्ताह के दौरान यानी 27 अक्टूबर से 02 नवंबर तक, 2020 में सामने आए 23,628 मामलों के मुकाबले, 2021 में इसी अवधि में इसके केवल 12,853 मामले देखे गए, इस प्रकार 10,775 मामलों (लगभग 45.6%) की कमी देखी गई।

तरनतारन, अमृतसर, फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना और कपूरथला पंजाब राज्य में पराली जलाने के प्रमुख हॉटस्पॉट हैं। इसी तरह, हरियाणा में कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद, अंबाला और जींद प्रमुख हॉटस्पॉट हैं।

अब तक राज्य प्रवर्तन एजेंसियों और संबंधित राज्यों के अधिकारियों ने 8,575 खेतों का निरीक्षण किया है जहां पराली जलाने की सूचना मिली थी और लगभग 58,05,000 रुपये पर्यावरण मुआवजा (ईसी) लगाया गया है।

आयोग नियमित रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों के साथ पराली जलाने की घटना को रोकने के लिए रूपरेखा और कार्य योजना के सख्त कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। फसल कटाई अपने चरम पर है और राज्य सरकारें पराली जलाने की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रवर्तन और कार्यान्वयन की प्रभावशीलता में सुधार के लिए कार्य योजना के अनुसार कदम उठा रही हैं।

सीएक्यूएम ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों द्वारा फ्रेमवर्क और कार्य योजना के प्रभावी कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देने के साथ 2 नवंबर, 2021 को आयोग की एक बैठक भी आयोजित की।

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