कभी न खत्म होने वाले उत्सव और फिल्मों के प्रति उत्कट प्रेम को बढ़ाते हुए इफ्फी 52 का भव्य समापन

कभी न खत्म होने वाले उत्सव और फिल्मों के प्रति उत्कट प्रेम को बढ़ाते हुए इफ्फी 52 का भव्य समापन

समर इंडिया ब्यूरो

अक्सर यह कहा जाता है कि सभी अच्छी चीजों का समापन होना चाहिए। यह ठीक है लेकिन फिल्म समारोहों के लिए नहीं,निश्चित रूप से भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए नहीं, जिसे फिल्म प्रेमियों और इसके पारखी लोगों के बीच इफ्फी के रूप में जाना जाता है। हां,एशिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े फिल्म समारोह के 52वें संस्करण में प्रतीक के रूप में पर्दे नीचे आते हैं यानी इसका समापन होते ही सर्वोत्कृष्ट आईएफएफआई प्रतिनिधि सिनेमाई प्रेरणा और महान फिल्म कला के लिए असीम आकर्षण की लपटों को अपने भीतर ले जाना जारी रखेंगे। गोवा में हाइब्रिड प्रारूप में 20 – 28 नवंबर, 2021 के दौरान आयोजित नौ दिवसीय फिल्म समारोह के दौरान फिल्मों के प्रति फिर से चाहत की ज्वाला जगाई गई और जीवन में नई ताजगी भरी गई, कलात्मक उत्कृष्टता के मनोरम कैलाइडोस्कोप यानी बहुरूपदर्शक को धन्यवाद जिसके तहतभारतीय और विश्व सिनेमा के नवीनतम और सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को उत्कृष्ट तौर पर चयन किया गया और आईएफएफआई प्रतिनिधियों को स्क्रीन पर और बाहर दोनों जगहों पर फिल्में दिखाने की पेशकश की गई।

हां,एक सच्चा फिल्म प्रेमीफिल्मों के उत्सव से कभी ना तो पूरी तरह संतुष्ट हो सकता है और न ही कभी होगा यानी उसकी भूख बनी रहेगी।फिल्म निर्माण की कला और विज्ञान के उत्साही प्रशंसकों के प्रचार प्रभाव के कारणआईएफएफआई जैसे फिल्म समारोह आधिकारिक रूप से बंद होने पर भी जीवित रहेंगे,उनकी विद्युतीय भावना दिमाग में गूंजती है और उन लोगों के दिलों को रौशन करती है जिन्हें सौभाग्य से उत्सव में शामिल होने का मौका मिला।

निरंतरता की इस भावना और उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की लालसा के साथ आईएफएफआई का 52वां संस्करण आज28 नवंबर, 2021 को गोवा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंडोर स्टेडियम में संपन्न हुआ। प्रथानुसार शानदार सांस्कृतिक प्रदर्शन और कलात्मक समारोहों के अलावा, इसके समापन समारोह का मुख्य आकर्षण निश्चित रूप से महान फिल्मों और उन्हें बनाने वाले लोगों कीविशिष्ट पहचान और शुद्ध रूप से सहयोग के लिए आईएफएफआई की स्थायी प्रतिबद्धताजो उसकी खास पहचान है और जो इसके आयोजकों और प्रत्येक संस्करण की सफलता के पीछे जा जान से लगे हितधारकों को प्रभावित करती है।

भारतीय और विश्व सिनेमा के क्रेम डे ला क्रेम का सम्मान: आईएफएफआई पुरस्कार

मसाकाजू कानेको की जापानी फिल्म ‘रिंग वांडरिंग’ को आईएफएफआई 52 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के रूप में चुना गया हैऔर आईएफएफआई के 52वें संस्करण में इसे प्रतिष्ठित गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

निर्देशक मसाकाज़ु कानेको को 20 लाख रुपये के नकद पुरस्कार के अलावागोल्डन पीकॉक और एक प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। जबकि, फिल्म के निर्माता ताकाशी शिओत्सुकी को एक प्रमाण पत्र और 20 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।

इस फिल्म के लिए अपनी प्रशंसा जाहिर करते हुए फिल्म समारोह की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता जूरी ने 2021 की फिल्म ‘रिंगू वांडरिंगु’ को कल्पना और वास्तविकता के बीच बेतहर तालमेल की शानदार फोटोग्राफीके लिए सराहा जो वर्तमान जापानी समाज में अतीत की गूँज के साथ एक खास आकर्षण को दर्शाती है।

गोल्डन पीकॉक अवार्ड में 40 लाख रुपये (4 मिलियन रुपये) का नकद पुरस्कार और एक प्रमाण पत्र होता है। 

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए सिल्वर पीकॉक चेक निर्देशक वाक्लाव कद्रनका की ‘सेविंग वन हू इज़ डेड’ को प्रदान किया गया है। यह एक चेक फिल्म हैजो निराशा की सर्दी के बीच भी आशा की एक मोमबत्ती जलाए रखती है।

जूरी ने इस फिल्म की प्रशंसा की है कि यह सायंबेला में फंसी एक मां और बेटे की ऐसी दृश्य कहानी है जिसमें मौत और जीवन की कल्पनाओं का इंद्रजाल बुना गया है और इसकी कल्पना बड़ी कुशलता और आत्मविश्वास के साथ की गई है। इसमें प्रत्येक चित्र-शैली के फ्रेम की रचना की गई है और इसे विवरण के साथ प्रदर्शन किया गया है। यहां और पढ़ें।

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड में एकप्रमाण पत्र और 15 लाख रुपये (1.5 मिलियन रुपये) नकद दिया जाता है।

फिल्म ‘गोदावरी’ में दिवंगत मराठी अभिनेता और फिल्म निर्माता निशिकांत कामत को पर्दे पर जीवंत करने के लिए भारतीय और मराठी अभिनेता जितेंद्र भीकुलाल जोशी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) के लिए सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड प्रदान किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय जूरी ने बताया कि परेशान निशिकांत का उग्र आंखों वाला चित्रण आकर्षक और शोकाकुल है। जूरी ने अभिनय की प्रशंसा करते हुए कहा कि हालांकि, उनका (निशिकांत) चरित्र काफी जटिल है,लेकिन उनके (भीकुलाल) शानदार प्रदर्शन ने उन्हें (निशिकांत को) अपने गुस्से से आंसुओं तक एक नदी की तरह प्रवाहित कर दिया। जोशी को सिल्वर पीकॉक, एक प्रमाण पत्र और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (महिला) के लिए सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड स्पेनिश अभिनेत्री एंजेला मोलिना को शार्लोट के रूप में उनकी भूमिका के लिए दिया गया। अपने अभिनय में उन्होंने समान रूप से सहानुभूति और हताशा का मनोरम प्रदर्शन किया है।https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?dnt=false&embedId=twitter-widget-0&features=eyJ0ZndfZXhwZXJpbWVudHNfY29va2llX2V4cGlyYXRpb24iOnsiYnVja2V0IjoxMjA5NjAwLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2hvcml6b25fdHdlZXRfZW1iZWRfOTU1NSI6eyJidWNrZXQiOiJodGUiLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X3NwYWNlX2NhcmQiOnsiYnVja2V0Ijoib2ZmIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH19&frame=false&hideCard=false&hideThread=false&id=1464973411319377923&lang=en&origin=https%3A%2F%2Fpib.gov.in%2FPressreleaseshare.aspx%3FPRID%3D1776327&sessionId=3440e51c6b8d3022d506297c86f739dffb08ac9c&theme=light&widgetsVersion=f001879%3A1634581029404&width=550px

फिल्म में जूरी ने पाया कि एंजेला मोलिना एक ऐसा चरित्र निभा रही है जो एक वृद्ध दिवा के रूप में चालाकऔर असुरक्षित दोनों है। “वह ऐसा प्रदर्शन करती है जिससे सहानुभूति और हताशा दोनों समान रूप से झलकती है और कैमरा के सामने उसका मोहक लेकिन ठगी से भरा अंदाज साफ दिखता है जिसने जूरी के सभी सदस्यों को भी मोहित कर लिया है।” यहाँ और पढ़ें मोलिना को एक सिल्वर पीकॉक, एक प्रमाण पत्र और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।

निखिल महाजन की मराठी फिल्म ‘गोदावरी’ और ब्राजीलियाईअभिनेता रेनाटा कार्वाल्हो जिन्होंने निर्देशक रोड्रिगो डी ओलिवेरा की ‘द फर्स्ट फॉलन’ में अभिनय किया है, को सिल्वर पीकॉक स्पेशल जूरी अवॉर्ड दिया गया है।

विशेष जूरी पुरस्कार एक फिल्म (फिल्म के किसी भी पहलू के लिए जिसे जूरी पुरस्कार देना चाहता है) या एक व्यक्ति (फिल्म में उसके कलात्मक योगदान के लिए) को दिया जाता है। जब किसी फिल्म को पुरस्कृत किया जाता है तो पुरस्कार फिल्म के निर्देशक को दिया जाता है।

निखिल महाजन की फिल्म ‘गोदावरी’ एक व्यक्ति की सदियों पुरानी परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करने की दार्शनिक खोज की कहानी है,जो गोदावरी नदी के साथ उनके संबंधों से प्रेरित और पल्लवित है। फिल्म के बारे में जूरी ने बताया कि इस फिल्म का उद्देश्य अगली पीढ़ी को स्नैपशॉट के माध्यम से वर्ष 2020 में नदी के हालात की जानकारी देना है। “फिल्म गोदावरी शक्तिशाली गोदावरी नदी का एक अविश्वसनीय रूपक चित्रण है, जो बताती है कि कैसे बदलते समय के साथ नदियां गंदी हो सकती हैं।”

निर्देशक रोड्रिगो डी ओलिवेरा की फिल्म ‘द फर्स्ट फॉलन’1980 के दशक में ब्राजील में यौन अल्पसंख्यकों द्वारा झेली गई पीड़ा और भेदभाव की अनकही कहानियों को लिपिबद्ध करने (पर्दे पर दिखाने) का भावुक और साहसी प्रयास है। यह एक अतीत का फिल्मांकन हैजो ब्राजील में एक बार काफी लंबे समय के साथ-साथ बहुत ही वर्तमान है। ब्राजील की अभिनेत्री और सहायक निर्देशिक को फिल्म में उनके योगदान के लिए विशेष जूरी पुरस्कार प्रदान किया गया है जो जूरी के अनुसार, “सिर्फ प्रदर्शन से काफी परे” है।

विशेष जूरी पुरस्कार में एक सिल्वर पीकॉक,एक प्रमाण पत्र और 15 लाख रुपये (1.5 मिलियन रुपये) का नकद पुरस्कार शामिल है।

निर्देशक रोमन वास्यानोव की रूसी फिल्म ‘द डीओआरएम / ऑब्स्चागा’ को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता जूरी ने विशेष तौर पर उल्लेख किया है। जूरी ने कहा कि फिल्म ‘द डीओआरएम’1984 के तत्कालीन यूएसएसआर की कहानी है जिसे एक विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले कुछ युवाओं के नजरिए से जटिल और भ्रष्ट समाज का चित्रण करने के लिए अच्छी तरह से फिल्माया गया है।

निर्देशक मैरी एलेसेंड्रिनी की ज़होरीएक निडर युवा लड़की की कहानी है, जो अपनी आज़ादी के सपने को साकार करने के लिए स्कूल और माता-पिता के खिलाफ विद्रोह कर देती है। इस फिल्म को किसी निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फीचर फिल्म के लिए आईएफएफआई 52 अवॉर्ड प्रदान किया गया है।

डेब्यू डायरेक्टर और अभिनेता साइमन फैरियोल की स्पैनिश फिल्म ‘द वेल्थ ऑफ द वर्ल्ड / ला रिक्वेजा डेल मुंडो’ को डेब्यू फीचर फिल्म प्रतियोगिता श्रेणी में जूरी से विशेष चर्चा मिली है।

यहां पुरस्कारों के बारे में और पढ़ें।

लिंगुईद सेक्रेड बॉन्ड्स” को आईएफएफआई 52 में आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पुरस्कार मिला

महात्मा गांधी के शांति,सहिष्णुता और अहिंसा के आदर्शों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाने वाली फिल्म को दिया जाने वाला प्रतिष्ठित आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पुरस्कारचाड फिल्म निर्माता महामत सालेह हारून की फिल्म ‘लिंगुई,द सेक्रेड बॉन्ड्स’ को प्रदान किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सह-निर्मित ड्रामा फिल्म ‘लिंगुई,द सेक्रेड बॉन्ड्स’ महिला संघर्षों का एक साहसिक चित्रण और मानवता के लिए एक सबक है। यह एक मां और बेटी के बीच के पवित्र रिश्ते और पुरुषों द्वारा निर्धारित कठोर कानूनों के खिलाफ उनके जीवित रहने की कहानी है।

इस पुरस्कार में एक प्रमाण पत्र और एक पदक दिया जाता है और यह अंतर्राष्ट्रीय फिल्म, टेलीविजन और ऑडियो-विजुअल कम्युनिकेशन (आईसीएफटी) पेरिस से आईएफएफआई के सहयोग के एक हिस्से के रूप में दिया जाता है।

ब्रिक्स फिल्म महोत्सव में दक्षिण अफ्रीकी फिल्म बराकत और रूसी फिल्म द सन अबव मी नेवर सेट्सको सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला

आईएफएफआई से इतर पहली बार आयोजित होने वाले ब्रिक्स फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में 7वें ब्रिक्स फिल्म महोत्सव के पुरस्कारों की घोषणा की गई है। जूरी में सभी पांच ब्रिक्स देशों से एक-एक सदस्य होते हैं जिसके अध्यक्ष राहुल रवैल हैं।

सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दक्षिण अफ्रीकी फिल्म ‘बराकत’ और रूसी फिल्म ‘द सन अबव मी नेवर सेट्स’ को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया है।

ब्राजील के नए सिनेमा की आवाज फिल्मकार लूसिया मूरत को उनकी रोचक डॉक्यूमेंट्री ‘एना’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया है।

भारतीय अभिनेता धनुषकोफिल्म ‘असुरन’ में एक किसान के गंवई रूप को पर्दे पर चरितार्थ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) का पुरस्कार दिया गया।

ब्राजील की अभिनेत्री लारा बोल्डोरिनी को ‘ऑन व्हील्स’ में उनकी आने वाली उम्र की भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (महिला) से सम्मानित किया गया है और चीन के निर्देशक यान हान को ‘ए लिटिल रेड फ्लावर’ के लिए विशेष उल्लेख पुरस्कार मिला है।

तो, ब्रिक्स देशों द्वारा बनाए गए सिनेमाई विशिष्टता के उत्पादों में से इन पुरस्कारों के चयन का क्या मार्गदर्शन हुआ? ब्रिक्स फिल्म महोत्सव जूरी के अध्यक्ष ने कहा: “हमने 20 फिल्में देखीं। जब विजेताओं की बात आई तो हम सभी व्यावहारिक रूप से एक ही सोच पर थे। यही सिनेमा की ताकत है और इसी तरह दुनिया आगे बढ़ रही है। हम वास्तव में चाहते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री का ब्रिक्स को दुनिया में एक ताकत बनाने का सपना जल्द ही साकार हो।

ब्रिक्स जूरी के सदस्यों को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सम्मानित किया।

प्रसून जोशी को इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर अवॉर्ड 2021 मिला

गीतकार और सीबीएफसी के अध्यक्ष श्री प्रसून जोशी को इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर अवार्ड 2021से नवाजा गया है। फिल्मों, अनूठे टीवी विज्ञापनों और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानियों में अपने भावपूर्ण और प्रेरक गीतों के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध श्री प्रसून जोशीपद्म श्री पुरस्कार विजेता हैं। इसके साथ ही श्री जोशी कई अन्य राष्ट्रीय पुरस्कारों के विजेता हैं। श्री जोशी ने युवा और नवोदित फिल्म निर्माताओं कोजीवन में आए भ्रम की स्थिति का जश्न मनाने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा,“युवा लोगों को भ्रम की स्थिति का जश्न मनाना शुरू कर देना चाहिए। भ्रम की स्थिति सबसे उपजाऊ अवस्था है और सबसे अधिक असुविधाजनक है, लेकिन सबसे अच्छे विचारों की उत्पत्ति भ्रम में होती है।”

श्री जोशी ने कहा कि फिल्म निर्माण में सफलता डिजाइन से होनी चाहिए,न कि संयोग से। उन्होंने कहा,’मुझे लगता है कि फिल्में जादू होनी चाहिए लेकिन फिल्म निर्माण जादू नहीं होना चाहिए। मुझे लगता है कि सफलता डिजाइन से होनी चाहिए न कि संयोग से। हमें फिल्म निर्माण से अवसरों को जोड़ना कम करना चाहिए क्योंकि हमारे पास इस देश में कई तेज-तर्रार लोग हैं जो अच्छी फिल्में बनाने के लिए उतावले हैं।”

उन्होंने महत्वाकांक्षी फिल्म निर्माताओं को आगाह किया कि महान सिनेमा का कोई शॉर्टकट नहीं है,इसलिए फिल्म निर्माताओं को यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि वे शॉर्टकट से कहीं पहुंच जाएंगे।

जैसा कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने पहले घोषित किया था, श्री प्रसून जोशी और प्रसिद्ध भारतीय और बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी को यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। सुश्री हेमा मालिनी को जहां आईएफएफआई के उद्घाटन समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया गया वहीं श्री प्रसून जोशी को आज समापन समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

52वें आईएफएफआई ने नई तकनीक को अपनाया,युवा प्रतिभाओं को मंच दिया: आईएफएफआई 52 समापन समारोह में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सिनेमा के सशक्त माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति के बेहतरीन रूपों को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

केंद्रीय मंत्री ने फिल्म प्रेमियों से कहा कि 52वां आईएफएफआई हमें नई शुरुआत की ओर ले जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम फिल्म निर्माण की अपनी समृद्ध परंपरा और सिनेमा के माध्यम से कहानी कहने की कला का जश्न मनाने के लिए एक साथ आए हैं। सिनेमा की बड़ी हस्तियों के बीच होने के कारण हमने दर्शकों को आकर्षित किया है और युवा प्रतिभाओं को पहचाना है।”

52वें आईएफएफआई को अनेक प्रथमों का समारोह बताते हुए केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि आईएफएफआई बदलावों के रूख के साथ तालमेल बिठाता रहा है। उन्होंने कहा,“इस आईएफएफआई में पहली बार,हमारे पास ओटीटी प्लेटफार्मों की मौजूदगी और उत्साही भागीदारी थी। आईएफएफआई ने इस बार नई तकनीकों को अपनाया है औरदर्शकों के लिए मंचों के कई विकल्प मुहैया कराए और इस प्रकार बदलते समय के साथ तालमेल बिठाया है। हमने ब्रिक्स देशों की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों का भी प्रदर्शन किया है और हम आशा करते हैं कि यह साझेदारी और आगे बढ़ेगी।”

सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने बताया कि आईएफएफआई का साल दर साल विस्तार होता जा रहा है। उन्होंने कहा,“इस आईएफएफआई में, फिल्म निर्माताओं,छात्रों और सिने प्रेमियों सहित दुनिया भर के लगभग 10,000 प्रतिनिधियों ने हाइब्रिड प्रारूप में भाग लिया। इसमें 234 स्क्रीनिंग हुई जिसमें लगभग 450 घंटे की फिल्में दिखाई गईं। ऑनलाइन देखे गए कुल घंटे 30,000 से अधिक घंटे हैं। ”

सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए बताया कि इस साल के आईएफएफआई में73 देशों की 148 से अधिक विदेशी फिल्में दिखाई गईं जो फिल्म प्रेमियों के लिए एक अनूठा अनुभव रहा। इस समारोह में 12 वर्ल्ड प्रीमियर, 7 इंटरनेशनल प्रीमियर, 24 एशिया प्रीमियर और 74 इंडिया प्रीमियर हुए। समारोह में 75 भारतीय फिल्मों को पर्दे पर दिखाया गया जिनमें से 17 फिल्मों को विशेष रूप से भारत @75खंड के तहत चुना गया था।

ओटीटी प्लेटफार्मों के साथ पहली बार सहकार्य के बारे में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने ऑनलाइन कार्यक्रमों और उत्सव में भागीदारी के बारे में कुछ विवरण दिया। उन्होंने कहा, “ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक साथ 50 से अधिक फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के सहयोग से 10 मास्टर क्लास और वार्ता (इन-कनवर्सेशन) सत्र आयोजित किए गए। मनोज बाजपेयी, ऋतिक रोशन,शूजीत सरकार और सिनेमा के कई अन्य दिग्गजों ने महोत्सव में अपने अनुभव और कला साझा की।

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने श्री प्रसून जोशी की सराहना की,जिन्हें इंडियन फिल्म पर्सनालिटी ऑफ द ईयर अवॉर्ड 2021 प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा, “प्रसून जोशी सिर्फ एक प्रतिभा के धनी नहीं, बल्कि विविध प्रतिभाओं के मालिक हैं। मुझे खुशी है कि श्री जोशी को अभिनेत्री हेमा मालिनी के साथ भारत की आजादी के 75वें वर्ष के अवसर पर यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने सभी से वादा किया कि आईएफएफआई का आयोजन अगले साल उसी समय और स्थान पर होगा जैसा कि इस संस्करण में हुआ,यानी 20 से 28 नवंबर, 2022 के दौरान और गोवा में ही।

भारतीय सिनेमा के घर-घर चर्चित कलाकारों की मौजूदगी नेसमापन समारोह की चमक और सम्मान बढ़ाया

समापन समारोह में सम्मानित अतिथि के रूप में बहुचर्चित और प्रख्यात भारतीय अभिनेत्री माधुरी दीक्षित थी। इस अवसर पर फिल्म प्रेमियों को संबोधित करते हुएमाधुरी दीक्षित ने कहा कि आईएफएफआई 52 का हिस्सा बनना एक सम्मान की बात है,जिसे उन्होंने भारत का सबसे बड़ा और सबसे अधिक मान्यता प्राप्त फिल्म समारोह बताया। उन्होंने कहा, “यह जानकर खुशी हो रही है कि आईएफएफआई भारतीय फिल्म निर्माताओं और तकनीशियनों को एक वैश्विक मंच प्रदान करता है,जिससे उन्हें वैश्विक मंच पर भारतीय मनोरंजन के कौशल का प्रदर्शन करने कामौका मिलता है। दर्शकों के सामने कोई नई कहानी पेश करने में अगर साल नहीं तो कई महीने जरूर लग जाते हैं। मैं हर फिल्म निर्माता,कलाकार और तकनीशियन की सराहना करना चाहती हूं कि उन्होंने अपने सपनों को साकार करने का साहस किया और हमें उनकी कहानियां देखने का मौका दिया।”

महिलाओं के योगदान और अपनीबात रखने के उनके अधिकार को मानते हुएमाधुरी दीक्षित ने आईएफएफआई के इस संस्करण में हेमा मालिनी के योगदान को पहचानने के लिए उन्हें इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं उसकी प्रशंसा करती हूं,और मैंने कई सालों से उनकी प्रशंसा की है।”

माधुरी दीक्षित ने बताया कि आईएफएफआई ने हाल के वर्षों में वैसी कई फिल्मों का प्रदर्शन किया है जो महिलाओं द्वारा बनाई गई हैं या जिनमें महिलाओं ने कैमरे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, मैं उनके योगदान की सराहना करती हूं।

कहानी कहने के नए माध्यमों को पहचानने में आईएफएफआई इस साल बहुत खास रहा है। उन्होंने कहा कि वीडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं को पहली बार समारोह में किस्सागोई का हिस्सा बनाया गया है। माधुरी दीक्षित ने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि पिछले कुछ वर्षों में वीडियो स्ट्रीमिंग ने मनोरंजन के लिए वीडियो बनाने और उसका आनंद उठाने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाया है। टीवी और थिएटर के साथ,ओटीटी प्लेटफॉर्म हमारे उद्योग को मजबूती से आगे बढ़ने में मदद करना जारी रखेंगे।”

माधुरी दीक्षित ने कहा कि पहले की तुलना में महिलाएं आज फिल्म उद्योग में बहुत सी अलग-अलग भूमिकाएं निभाती हैं। जबकि, पहले कुछ ही महिलाएं फिल्मों में प्रमुख भूमिकाएं निभाती थीं। महिलाओं के लिए फिल्मों में आने का यह शानदार समय है।

समापन समारोह में अनुभवी अभिनेता,फिल्म निर्माता और निर्देशक रणधीर कपूर और अभिनेता मनोज बाजपेयी को भी सम्मानित किया गया।

इस सम्मान के लिए आईएफएफआई को धन्यवाद देते हुएश्री मनोज बाजपेयी ने कहा कि आईएफएफआई नए फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक महान माध्यम है। उन्होंने कहा “भारत आने वाले वर्षों में मनोरंजन उद्योग में एक बड़ी ताकत बन सकता है और आईएफएफआई इसमें एक बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है।”

समुद्र तटीय राज्य गोवा में भारत और दुनिया भर से आए फिल्म प्रेमियों को संबोधित करते हुएगोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने उन कई महान कलाकारों और तकनीशियनों के बारे में याद दिलाया जो गोवा से हैं और जिन्होंने फिल्म उद्योग के विकास के लिए अत्यधिक योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि बहुत कम ही लोग जानते हैं कि संपादन में राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले पहले व्यक्ति वामन पी. भोंसले थे जो गोवा वासी थे।

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुएबताया कि गोवा के युवाओं ने फिल्म निर्माण में बहुत उत्साह दिखाया है, फीचर और गैर-फीचर फिल्मों के गोवा खंड के तहत उनकी छह फिल्में प्रदर्शित की गईं। गोवा को एक खूबसूरत जगह और इसकी वास्तुकला को विश्व प्रसिद्ध बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ.प्रमोद सावंत ने कहा कि इन्हीं कारणों से फिल्म निर्माताओं को गोवा के प्रति विशेष लगाव है।

गोवा में फिल्म सिटी बनाने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुएश्री सावंत ने कहा, “गोवा में फिल्म सिटी और पोस्ट-प्रोडक्शन सेंटर स्थापित करने के लिए हमारे प्रयास जारी रहेंगे। मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री के सहयोग और मार्गदर्शन से हम इस लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम होंगे।

भारतीय पैनोरमा की ओपनिंग फिल्म सेमखोर को स्पेशल मेंशन अवॉर्ड मिला

आईएफएफआई में प्रदर्शित होने वाली पहली डिमासा भाषा की फिल्म सेमखोर जिसे भारतीय पैनोरमा फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भी चुना गया है,को समापन समारोह में स्पेशल मेंशन से नवाजा गया और निर्देशक एमी बरुआ को सम्मानित किया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रीश्री अनुराग ठाकुर और प्रसिद्ध अभिनेता मनोज बाजपेयी ने संयुक्त रूप से अभिनेता से निर्देशक बने एमी बरुआ को सम्मानित किया। यह फिल्म सामाजिक वर्जनाओं से संबंधित है और असम में दिमासा समुदाय के संघर्षों को सामने लाने की एक कोशिश है।

एमी बरुआ की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “एमी बरुआ को दीमासा भाषा सीखने के लिए असम के आदिवासी समुदाय के कब्जे वाले स्थान पर एक साल तक रहना पड़ा। फिल्म को पूरा करने के लिए उन्हें शूटिंग को सुबह सबेरे जल्दी पूरी करने जैसे कई बाधाओं को पार करना पड़ा।”

समापन समारोह को संबोधित करते हुए महोत्सव निदेशक श्री चैतन्य प्रसाद ने कहा कि आईएफएफआई 52 प्रारूप में बदलाव का श्रेय केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को जाता है। उन्होंने कहा, “शुरू से ही केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर एक अलग तरह का समारोह चाहते थे,जो प्रेरणादायक, शिक्षाप्रद और सामने से नेतृत्व करने वाला हो। महामारी के बाद की अवधि में भारत जैसे बड़े देश में आयोजित हाइब्रिड उत्सव ने वैश्विक समुदाय के लिए इस तरह के समारोह आयोजित करने कीचुनौती रख दी है।”

आईएफएफआई 52 की मुख्य विशेषताएं

इस्तवन स्ज़ाबो और मार्टिन स्कॉर्सेस को सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला

विश्व सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा के दो दिग्गजों हंगेरियन फिल्म निर्देशक इस्तवन स्जाबो और अमेरिकी फिल्म निर्देशक,निर्माता,पटकथा लेखक और अभिनेता मार्टिन स्कॉर्सेसको 20 नवंबर,2021 को महोत्सव के उद्घाटन समारोह में सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।

इस्तवन स्ज़ाबो ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी स्वीकृति देते हुएकहा, “मैं इस तथ्य को महसूस करने के लिए गहराई से प्रेरित हूं कि भारतीय मेरी फिल्मों को जानते हैं और उनमें से कुछ इसे पसंद भी करते हैं।”

सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित होने के लिए अपना आभार व्यक्त करते हुएइस्तवन स्ज़ाबो ने एक वीडियो संदेश मेंमहान सत्यजीत रे के साथ अपनी उस मुलाकात के बारे में याद दिलाया,जो 30 साल से अधिक समय पहले तत्कालीन मद्रास में हुई थी। उन्होंने कहा, “रे ने मुझे और मेरी पत्नी को रात के खाने के लिए आमंत्रित किया था,जो बहुत अच्छा था। उनकी फिल्मों, फिल्म निर्माण और हमारे पेशे को लेकर हमारी शानदार चर्चा हुई थी। यह एक गहन चर्चा थी जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।”

इस्तवन स्ज़ाबो पिछले कुछ दशकों के समीक्षकों द्वारा सबसे अधिक प्रशंसित हंगेरियन फिल्म निर्देशकों में से एक हैं जिन्हें मेफिस्टो (1981) और फादर (1966) जैसी उत्कृष्ट फिल्मों के लिए जाना जाता है।

मार्टिन स्कॉर्सेस न्यू हॉलीवुड युग की प्रमुख हस्तियों में से एक हैं,जिन्हें व्यापक रूप से फिल्म इतिहास में सबसे महान और सबसे प्रभावशाली निर्देशकों में से एक माना जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा के प्रतीक मार्टिन स्कॉर्सेस ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अवॉर्ड के लिए अपनी स्वीकृति देते हुएकहा, “मैं वास्तव में महान फिल्म निर्माताओं में से एक और मेरी प्रेरणा रहे सत्यजीत रे के नाम पर इस तरह का पुरस्कार प्राप्त करने के लिए सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं बार-बार रे के काम पर लौट आया हूं और जब भी मैं उनकी फिल्में देखता हूं,यह मेरे लिए एक नया अनुभव बन जाता है। पाथेर पांचाली देखना मेरे लिए एक रहस्योद्घाटन अनुभव था और इसने मुझे एक नई दुनिया का दर्शन कराया।

आईएफएफआई ने 75 नवोदित “क्रिएटिव यंग माइंड्स ऑफ टुमैरो” को पहला मंच प्रदान किया

आजादी का अमृत महोत्सव के उत्साह के साथ हमारा देश स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का जश्न मना रहा है। ऐसे में आईएफएफआई ने भी फर्स्ट-एट-आईएफएफआई पहल के तहत, देश भर के 75 युवा महत्वाकांक्षी फिल्म निर्माताओं को आईएफएफआई जैसे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रचनात्मकता दिखाने का दुर्लभ मौका दिया है।

देश भर से प्रतियोगिता के माध्यम से 75 नवोदित सिनेमाई प्रतिभाओं को चुना गया है। इसका श्रेय एक नई पहल और केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर के दिमाग की उपज “75 क्रिएटिव माइंड्स ऑफ़ टुमॉरो” को दिया जाता है और इसके लिए इस नई पहल को धन्यवाद है। यह प्रतियोगिता देश में युवा रचनात्मक दिमागों और उभरती प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और पहचानने का एक प्रयास है।

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उनमें से कुछ न केवल फिल्म उद्योग के हिस्से के रूप में बल्कि सिनेमा के प्रतीक के रूप में भी कुछ वर्षों के बाद फिर मिलेंगे। “सिनेमा उद्योग के दिग्गजों द्वारा मास्टर क्लास जैसा उन्हें जिस तरह का प्रोत्साहन मिला,वे इस अवसर को पाने वाले भाग्यशाली लोगों में से एक हैं।”

35 वर्ष से कम आयु के 75 युवा प्रतिभाओं जिनमें 7 महिला और 68 पुरुष कलाकार शामिल हैं,को निर्देशन, संपादन, गायन और पटकथा सहित फिल्म निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट कौशल के आधार पर चुना गया है।

इनमें सबसे कम उम्र के क्रिएटिव माइंड विजेता बिहार के 16 वर्षीय आर्यन कुमार हैं,जिन्हें फिल्म निर्देशन में उनके कौशल के लिए चुना गया है। 75 नवोदित कलाकारों की सूची में कई ऐसे कलाकार शामिल हैं जिन्हें भारत के विभिन्न छोटे शहरों से चुना गया है। वे भारत के 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आईएफएफआई में आए हैं,जिनमें से पांच पूर्वोत्तर राज्यों असम और मणिपुर से और एक जम्मू-कश्मीर से है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म के साथ पहली बार सहकार्य

आईएफएफआई ने प्रौद्योगिकी, समाज, संस्कृति और सदियों पुराने और नए युग के अवसरों और चुनौतियों के बदलते स्वरूप के साथ अपने प्रगतिशील विकास और अनुकूलन को बनाए रखा है जो 21 वीं सदी के डिजिटल और इसस जुड़े युग में मानवता को रोकते हैं। इतिहास में पहली बार,नेटफ्लिक्स,अमेज़ॅन,सोनी और अन्य जैसे सभी प्रमुख ओटीटी प्लेटफार्मों ने विशेष मास्टरक्लास, सामग्री लॉन्च और पूर्वावलोकन, क्यूरेटेड फिल्म पैकेज स्क्रीनिंगऔर विभिन्न अन्य ऑन-ग्राउंड और वर्चुअल माध्यम से फिल्म समारोह में भाग लिया।

ओटीटी प्लेटफार्मों की भागीदारी भविष्य में एक नियमित सुविधा बन जाएगी जैसा कि 20 नवंबर,2021 को समारोह के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव ने घोषणा की है।

सहयोग के मुख्य आकर्षण में से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पेरिस स्थित स्कूल ऑफ इमेज एंड आर्ट्स, गोबेलिन्स, आईइकोले डी आई इमेज द्वारा तीन दिवसीय वर्चुअल मास्टरक्लास था। सहयोग के हिस्से के रूप में, नेटफ्लिक्स द्वारा इस मास्टरक्लास का आयोजन किया गया है।

प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन अभिनीत नई नेटफ्लिक्स क्राइम ड्रामा टीवी सीरीज़अरण्यक का प्रीमियर एक और उल्लेखनीय घटना थी। इसकी कहानी एक रहस्यमय हत्या के इर्द-गिर्द बुनी गई है जिसमें राजनीतिक दांवपेच,व्यक्तिगत एजेंडा और एक क्रूर मिथक का जटिल मिश्रण है। इस कहानी में हर कोई संदिग्ध है और हर किसी के पास एक रहस्य है। आईएफएफआई में फिल्म प्रतिनिधियों के लिए आज महोत्सव में इस टीवी सीरीज के पहले एपिसोड की स्क्रीनिंग की गई। श्रृंखला का प्रीमियर 26 नवंबर,2021 को समारोह में किया गया है।

आईएफएफआई 52:उपभोक्ता सिनेमाई उत्कृष्टता का एक अतृप्त अक्षय पात्र

आईएफएफआई के 52वें संस्करण में300 से अधिक फिल्में दिखाई गईं। फिल्म प्रेमियों को सिनेमा का विशाल विकल्प दिया गया जिसकी प्रचुरता और समृद्धि की केवल फिल्म प्रतिनिधियों की अच्छे सिनेमा के लिए अटूट भूख से प्रतिद्वंद्विता थी – एक भूख जो केवल तेज होती है,जो अच्छा है उसका आनंद लेता है। महोत्सव में भारतीय और विश्व सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ 300 से अधिक फिल्मों को ऑफलाइन और वर्चुअल दोनों तरह से प्रदर्शित किया गया, जिससे फिल्म प्रेमियों के बीच मानवीय भावनाओं,विचारों,भय और आकांक्षाओं की सीमा,गहराई और तीव्रता का पता चलता है।

समारोह में लगभग 73 देशों की 148 फिल्मों को अंतर्राष्ट्रीय खंड में फिल्म प्रेमियों को दिखाया गया, जोउनकी सोच और उनके दिल को विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं में लोगों के जीवन,संघर्षों और तलाशों के लिए नई दुनिया का दर्शन कराती है, जो मानवता के साझा धागे और कला तथा सिनेमा के महान कार्यों से लोगों को जोड़ता है।

समारोह के इस संस्करण में 12 विश्व प्रीमियर,लगभग 7 अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियर,26 एशिया प्रीमियर और लगभग 64 भारत प्रीमियर का एक सराहनीय रिकॉर्ड बना है। समारोह में इस बार 95 देशों से 624 फिल्में मिलीं, जो पिछले संस्करण में 69 देशों की फिल्मों से अधिक हैं।

वेनिस फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के विजेता जेन कैंपियन द्वारा निर्देशित फिल्म ‘द पावर ऑफ द डॉग’ को मिड फेस्ट फिल्म के रूप में प्रदर्शित किया गया था।

निर्देशक असगर फरहादी की ग्रैंड प्री पुरस्कार विजेता फिल्म‘ए हीरो’के प्रदर्शन के बाद समापन समारोह के साथ आज इस महोत्सव का समापन किया गया।

आईएफएफआई के विश्व पैनोरमा खंड में दुनिया भर की55बेहतरीन फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। फेस्टिवल कैलिडोस्कोप में 11 फिल्में प्रस्तुत की गई हैं, जिनमें टाइटेन (फ्रेंच) और सौद (अरबी) जैसी फिल्में शामिल थी।

महानुभावों की स्मृति में

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का हर संस्करण फिल्म दुनिया के उन दिग्गजों को श्रद्धांजलि देता है जिन्हें फिल्म उद्योग ने खो दिया। 52वें आईएफएफआई 52 के श्रद्धांजलि खंड में दिग्गजों को श्रद्धांजलि के रूप में बर्ट्रेंड टैवर्नियर,क्रिस्टोफर प्लमर,जियान-क्लाउड कैरियर और जियान-पॉल बेलमंडो की फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। आईएफएफआई 52 ने भारतीय फिल्म दिग्गज बुद्धदेव दास गुप्ता (निर्देशक), दिलीप कुमार (अभिनेता), नेदुमुदी वेणु (अभिनेता), पुनीत राजकुमार (अभिनेता), संचारी विजय (अभिनेता), सुमित्रा भावे (निर्देशक), सुरेखा सीकरी (अभिनेत्री) और वामन भोंसले (फिल्म संपादक) को भी श्रद्धांजलि दी।

इस महोत्सव में बड़े पर्दे पर पहले जेम्स बॉन्ड सर सीन कॉनरी को भी विशेष श्रद्धांजलि दी गई।

पुनरावलोकन

52वें आईएफएफआई में पुनरावलोकन खंड में प्रसिद्ध हंगेरियन फिल्म निर्माता बेलतार और रूसी फिल्म निर्माता और मंच निर्देशक आंद्रेई कोंचलोव्स्की की फिल्मों को दिखाया गया।

हंगेरियन फिल्म निर्माताबेलतार ने अपनी खुद की दृश्य शैली बनाई है। उनकी फिल्मों ने बर्लिन, कान्स और लोकार्नो फिल्म फेस्टिवल में भी वाहवाही बटोरी।

कोंचलोव्स्की की फिल्मों ने कई पुरस्कार जीते हैं,जिनमें कान्स ग्रांड प्री स्पेशल डू जूरी, एक एफआईपीआरईएससीआई अवार्ड,दो सिल्वर लायंस,तीन गोल्डन ईगल अवार्ड और एक प्राइमटाइम एमी अवार्ड शामिल हैं।

आईएफएफआई में फिल्मी हस्तियों से प्रेरणा के पचास दिग्गजों का चयन करें

समारोह के इस संस्करण में नीचे कलात्मक सुंदरता और प्रेरणा का एक अपूर्ण रूप से परिपूर्ण विषय प्रस्तुत है जिसमें फिल्म प्रेमी खुद को डूब सकते हैं। हम इस क्यूरेटेड संग्रह को कला के रचनात्मक कार्यों के रचनाकारों और पारखियों के बीच समारोहसे इतर आयोजित बातचीत के दौरान फिल्म निर्माताओं द्वारा साझा किए गए अंतर्दृष्टिपूर्ण,प्रेरक और अक्सर उत्तेजक विचारों के माध्यम से लाने का प्रयास करते हैं।

  1. आकांक्षी निर्देशकों को अपनी कहानियों में दृढ़ विश्वास रखना चाहिए: आईएफएफआई 52 मास्टर क्लास में मधुर भंडारकर
  1. द किंग ऑफ ऑल द वर्ल्ड 12 साल के अंतराल के बाद कार्लोस सौरा की फिक्शन की दुनिया में वापसी करने वाली फिल्म है: यूसेबियो पाचा, आईएफएफआई 52 ओपनिंग फिल्म के निर्माता
  1. विविध फिल्मों के उभरने के लिए फिल्म निर्माताओं में विविधता महत्वपूर्ण है: आईएफएफआई 52 इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर अवार्डी प्रसून जोशी आईएफएफआई मास्टर क्लास में
  1. आकांक्षी अभिनेताओं को खुद को ओलंपिक एथलीट के रूप में प्रशिक्षित करना चाहिए: ऋतिक रोशन
  1. इफ्फी में फिल्म का प्रदर्शन करना सम्मान की बात : अभिनेता कार्तिक आर्यन
  1. वे वास्तविक है,इसलिए वे वही हैं जो वे हैं: एमी बरुआ, दिमासा भाषा में पहली आईएफएफआई भारतीय पैनोरमा फिल्म के निर्देशक और अभिनेता
  1. गैर-फीचर फिल्मों को सिनेमाघरों और ओटीटी प्लेटफार्मों में अधिक मौके देने की जरूरत है: आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा गैर फीचर अनुभाग के अध्यक्ष
  1. वीरांगना: आईएफएफआई 52 में दिखाई गई फिल्म जिसमें महिलाओं की रक्षा करने वाली महिलाओं की वीरता और साहस की कहानी है
  2. एक मध्यम वर्गीय भारतीय का जीवन एक कॉमेडी है;यह मेरे पात्रों को प्रेरित करता है: मनोज बाजपेयी आईएफएफआई इन-कन्वर्सेशन सत्र में
  1. रे की फिल्में को अवश्य देखना चाहिए, उन्होंने फिल्म निर्माताओं को प्रेरित करना कभी नहीं छोड़ा: आईएफएफआई 52 मास्टरक्लास में एफटीआईआई प्रोफेसर गंगा मुखी
  1. हम जो देखना चाहते हैं उसे बनाने की आज़ादी मिलना सुंदर है: आईएफएफआई 52 में ‘राफेला’ अभिनेता जुडिथ रोड्रिगेज
  1. बूमबा राइड समाज को ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बदलने में शिक्षा की अपार जरूरतों को दिखाना चाहता है: आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा फिल्म निर्देशक बिस्वजीत बोरा
  2. दिल्ली मेट्रो के तीसरे चरण के दौरान सामने आई इंजीनियरिंग बाधाओं को दर्शाती है “सरमाउंटिंग चैलेंजेज” : निदेशक अनुज दयाल
  1. “लीडर” पुरुषों के नजरिए से महिलाओं को चित्रित करने का एक प्रयास है: आईएफएफआई 52 अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता फिल्म के निर्माता कोरेक बोजानोवस्की
  1. मेरा मानना ​​है कि फिल्मों को समय और स्थान का स्नैपशॉट होना चाहिए: आईएफएफआई 52 में “गोदावरी” के निर्देशक निखिल महाजन
  1. मैं चाहता था कि लोग “सरदार उधम” देखने के बाद जलियांवाला बाग को अपने साथ ले जाएं: आईएफएफआई 52 मास्टरक्लास में निर्देशक शूजीत सरकार
  1. “21वां टिफिन” उन सभी नि:स्वार्थ महिलाओं को श्रद्धांजलि है जिन्होंने दूसरों की अथक सेवा में अपनी पहचान खो दी: आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा फिल्म के निर्देशक विजयगिरी बावा
  1. “डोल्लू बताया है कि कैसे शहरीकरण ने स्वदेशी लोक कला रूपों को प्रभावित किया है”: आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा फिल्म निर्देशक सागर पुराणिक
  1. मैं इस फिल्म के माध्यम से 1990 के दशक के दौरान सोवियत से अलग हुए यूक्रेन में आम जीवन को दिखाना चाहता था: आईएफएफआई 52 में ‘राइनो’ के निदेशक ओले सेंत्सोव
  1. हम अपने समाज से अलग जीवन के प्रति असंवेदनशील हो गए हैं, शहरों में अकेलापन एक गंभीर विश्वव्यापी बीमारी बन गया है: आईएफएफआई 52 में ‘द नॉकर’ के निर्देशक अनंत नारायण महादेवन
  1. भारत के ब्लड शुगर की कहानी है ‘बिटरस्वीट’ : निर्देशक अनंत नारायण महादेवन
  1. “प्रॉमिजेज” ऐसी फिल्म है जो बताता है कि सत्ता मिलने के बाद आप क्या करते हैं,आप अपने वादों को कैसे पूरा करते हैं और अपने नागरिकों के जीवन को कैसे बदलते हैं: आईएफएफआई 52 विश्व पैनोरमा फिल्म निर्देशक थॉमस क्रुइथॉफ
  1. अनूठी और बांधकर रखने वाली आकर्षक कहानियां स्टार पैदा करती हैं: आईएफएफआई 52 में ‘अल्फा बीटा गामा’ के निर्देशक शंकर श्रीकुमार
  1. “राज कपूर: द मास्टर एट वर्क” शोमैन राज कपूर के बारे में नहीं है, बल्कि जोशीले पेशेवर’राज कपूर’ के बारे में है: आईएफएफआई 52 इन-कन्वर्सेशन सत्र में अनुभवी फिल्म निर्माता राहुल रवैल
  1. लघु फिल्में फिल्म निर्देशकों की पेशेवर यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं: लघु वीडियो क्यों बनाए विषय पर सेसिल ब्लोंडेल आईएफएफआई 52 मास्टरक्लास में
  1. अकेलापन अब लगभग एक महामारी की तरह है, मेरी फिल्म की उत्पत्ति हमारे अकेलेपन के अभिशाप में हुई है: आईएफएफआई 52 फिल्म “मणिक बाबर मेघ” के निर्देशक अभिनंदन बनर्जी
  1. ‘स्वीट बिरयानी’ एक फूड डिलीवरी बॉय के जीवन और भावनात्मक आघात को बयां करती है: आईएफएफआई 52 में निर्देशक के. जयचंद्र हाशमी
  1. मैं भारत के हर आम आदमी और महिला को “एसीटी-1978” समर्पित करना चाहता हूं, जिनके पास सरकारी अधिकारियों के हाथों काम कराने की न तो शक्ति है और न ही अपनी बाते कहने का हक़: आईएफएफआई 52 इंडियन पैनोरमा फीचर फिल्म निर्देशक मंजूनाथ एस.
  1. अगर दिव्यांग लोग नि:स्वार्थ भाव से प्रकृति से प्यार कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? आईएफएफआई 52 में ‘तालेदंडा’के निर्देशक प्रवीण कृपाकर
  1. मारीचझापी की लड़ाई हमारे इतिहास की किताबों में क्यों नहीं है, जिसमें सिर्फ एक रात में 15,000 लोग मारे गए थे, आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा गैर फीचर फिल्म “साईंबारी से संदेशखली” के निर्देशक
  1. ‘द फर्स्ट फॉलन’पहले नायकों – एलजीबीटीक्यू समुदाय – और एक अज्ञात वायरस के खिलाफ उनकी लड़ाई के अलिखित इतिहास का पता लगाता है: आईएफएफआई 52 में ब्राजील के फिल्म निर्माता रोड्रिगो डी ओलिवेरा
  1. दर्शकों के लिए कहानियां प्रेरक होनी चाहिए,एक अच्छी कहानी जीवन की पहेली और इसके विभिन्न संकटों के बारे में है: आईएफएफआई 52 मास्टरक्लास में प्रसिद्ध पटकथा लेखक सब जॉन एडाथटिल
  1. क्यों कुछ रह सकते हैं जबकि दूसरों को भागने पड़ेगा?’ यह एक आम प्रश्न है जिसे हम ‘एनी डे नाउ’के माध्यम से पूछना चाहते हैं: आईएफएफआई 52 अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता फिल्म के लेखक अंती राउतवा
  1. “हम इंसान सहानुभूति,दया और देखभाल दिखाने की अपनी क्षमता खो रहे हैं” जयराज, “निराय थाथकलुल्ला मरम (ट्री फुल ऑफ पैरट्स)” के निदेशक
  1. चुनौतीपूर्ण समय में भी आपको मुक्ति की चिंगारी को महसूस करने की जरूरत है: आईएफएफआई 52 में निर्देशक वक्लाव कद्रंक
  1. सनी का चरित्र बहुत सरल है और इसलिए उसे चित्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है: आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा फीचर फिल्म “सनी” के निर्देशक रंजीत शंकर
  1. ओटीटी प्लेटफॉर्म मल्टीप्लेक्स से बहुत अलग नहीं हैं, समानांतर सिनेमा को नुकसान होता रहेगा: आईएफएफआई 52 में रंजीत शंकर
  1. एक अभिनेता के रूप में मैं हर किरदार कोजीने की कोशिश करता हूं: फिल्म “द गेस्ट” के अभिनेता मारियानो पलासियोस
  1. “भगवदज्जुकम” संस्कृत भाषा में एक हल्की-फुल्की फिल्म बनाने का मेरा विनम्र प्रयास है: आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा फिल्म के निर्देशक यदु विजयकृष्णन
  2. द नाइट बिलॉन्ग टू लवर्स’प्यार और कामेच्छा की एक अंतरंग कहानी है: आईएफएफआई 52 में निर्देशक जूलियन हिलमोइन
  1. 94वें अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि ‘कूझंगल’वैवाहिक दुर्व्यवहार की पीड़ा को दर्शाती है। सरलतम रूप में बताई गई एक सरल कहानी दर्शकों को छूती है: निर्देशक विनोथराज पी.एस.
  1. स्वतंत्र सिनेमा या छोटी कहानियां सिर्फ समारोहों के लिए नहीं,सबके लिए होती हैं। उम्मीद है कि भविष्य में हमारे पास कोई मुख्यधारा या स्वतंत्र सिनेमा नहीं होगा, बल्कि सिर्फ सिनेमा होगा: कन्नड़ फिल्म “नीली हक्की” के निर्देशक गणेश हेगड़े
  1. आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा फिल्म ‘सिजौ’1958 तक भारत-भूटान सीमा पर प्रचलित सामंती भूमि कार्यकाल प्रणाली की क्रूरता का खुलासा करती है
  1. कलकोकहो’ संकट के दौरान मानवीय भावनाओं,हमारी अत्यधिक उदासीनता और चरम मानवता का एक काल्पनिक चित्रण है। फिल्म अस्थायी होने के साथ-साथ कालातीत भी है क्योंकि हम सभी महामारी के शिकार हैं”:आईएफएफआई 52 भारतीय पैनोरमा फीचर फिल्म के निर्देशक-जोड़ी राजदीप पॉल और शर्मिष्ठा मैती
  1. आईएफएफआई 52के प्रतिनिधियों को लघु फिल्म निर्माण पर वैश्विक परिप्रेक्ष्य मिला,ओटीटी प्लेटफार्मों के साथ पहली बार समारोह के लिए धन्यवाद। एक निर्माता को चाहिए कि वो एक कलाकार के सपनों को तब तक आगे ले जाएजब तक कि वेवास्तविकता नहीं बन जाते: आईएफएफआई 52 मास्टरक्लास में गोबेलिन्स शिराज बाजिन मौसी
  1. पहली बार आईएफएफआई से इतर ब्रिक्स फिल्म समारोह आयोजित किया गया। आईएफएफआई के ढांचे के भीतर ब्रिक्स फिल्म समारोह को अधिक दृश्यता मिल रही है: थांडी डेविड्स, जूरी सदस्य
  1. आईएफएफआई 52गोल्डेन पीकॉक की दावेदार फिल्म “नो ग्राउंड बिनिथ द फीट” यह दिखाना चाहता है कि जलवायु परिवर्तन कैसे मानव जीवन को प्रभावित कर सकता है और मनोवैज्ञानिक रूप से उसको चकनाचूर कर सकता है
  1. कुम्पाचो दरेयो” हमें अपनी जड़ों के प्रति निष्ठावान रहने के लिए कहता है,भले ही हम चाहे जितनी ऊंची उड़ान भरें और आसमान को छूएं;आपकी यात्रा का गंतव्य आपकी जड़ों के बारे में बताता है: आईएफएफआई 52 गोवा अनुभाग फिल्म निर्देशक हिमांशु सिंह
  1. गोवा में सूरज,रेत और समुद्र के अलावा भी बहुत कुछ है। मैं इसे अपनी फिल्मों के माध्यम से चित्रित करने की कोशिश कर रहा हूं: आईएफएफआई 52 गोवा सेक्शन की फिल्म “डी’कोस्टा हाउस” के निर्देशक जितेंद्र शिकारकर
  1. ‘रिंग वांडरिंग’ जापान के युद्धग्रस्त अतीत की गाथा है: आईएफएफआई 52 में निर्देशक मसाकाजू कानेको

तो आईएफएफआई का कभी समापन नहीं होता

समारोह करीब आता है,लेकिन यह कभी खत्म नहीं होता है। समारोह में शारीरिक तौर पर मौजूद और वर्चुअल तरीके से शामिल फिल्म प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को और आईएफएफआई 52 में मिले अपने अनुभवके लिए अल विदा कहा। समय रेत की तरह हमारे हाथ से निकल रहा है। यहां तक ​​​​कि जब हम महान फिल्मों और उनके निर्माणमें लगे लोगों को सम्मान देते हैं,तो समारोह के लिए एक मौन उदासीनता हवा भर देती है,और उत्सव की भावना को बढ़ावा देती रहेगी जो कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। महत्वाकांक्षी फिल्म प्रेमियों के मन, दिल और आत्मा में उत्सव, जैसा कि होना चाहिए,जारी रहेगा।

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