दीपदान कर अपनों की याद में आंखों में छलके आंसू

तिगरीधाम। भूदेव भगलिया

महाभारत काल से चली आ रही दीपदान का आज फिर देखने को मिला। चौदस की रात्रि में लाखों ं लोगों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए गंगा में दीपदान किया। अपने सगे संबंधी व परिजनों से बिछड़ों को याद कर उनके आंसू छलक उठे। इस परंपरा के निर्वहन के वक्त गंगा घाट ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मानों आकाश से तारे धरती पर उतर आए हों। दीयों की रोशनी से गंगा घाट जगमगा उठे। सूर्य ढलते ही दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया। दूर दराज से पहुंचे लोगों ने देररात तक दीपदान किया। इस बार कोरोना से जिनकी मौत हुई उनकी आत्माओं की शान्ति के लिये याद किया गया।


दीपदान महाभारत के समय से किये जा रहे है
कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर चौदस की रात्रि को दीपदान किया जाता है। ऐसा माना जाता है महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्म शांति के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम दीपदान किया था। बुधवार को हजारों की संख्या में लोगों ने गंगा घाटों पर पहुंचकर दीपदान किया। जिनके परिवार के सदस्य उनके बीच अब नहीं रहे। दीपदान उन्हीं दिवंगत आत्मों की शांति के लिए संबंधित परिवार के लोग करते हैं। सूर्यास्त होते ही दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया। देररात तक दीपदान जारी रहा।

दीपदान के लिए विशेष इंतजाम
तिगरी गंगा, गढ़ मेले के साथ ब्रजघाट में दीपदान को उमड़ने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ गंगा घाटों विशेष इंतजाम रहे। घाटों पर दीपदान की सामग्री लेकर ब्राह्मण मौजूद रहे। पूजा की सामग्री में पिंडदान, दीप, लौंग, बताशे, बांस की चटाई आदि सामग्री गंगा घाटों पर मौजूद रहे। काफी श्रद्धालु अपने घरों से दीपक और घी आदि घर लेकर गंगा घाट पर पहुंचे। तो कुछ लोगों ने गंगा घाट से दीपदान का सभी सामान खरीदा।

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