उत्तर प्रदेश

गंगा नदी से बरामद हुए तीनों एमबीबीएस छात्रों के शव, परिजनों में मची चीख-पुकार – पानी के नीचे रेत में फंसे मिले थे तीनों छात्रों के शव

गंगा नदी से बरामद हुए तीनों एमबीबीएस छात्रों के शव, परिजनों में मची चीख-पुकार – पानी के नीचे रेत में फंसे मिले थे तीनों छात्रों के शव

बदायूं। उझानी में कछला घाट पर गंगा में डूबे एमबीबीएस के तीनों छात्रों के शव रविवार दोपहर एक बजे तलाश कर लिए गए। तीनों छात्रों के शव घटनास्थल से करीब पौन किलोमीटर दूर पानी के नीचे रेत में फंसे मिले। एसडीआरएफ ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से उन्हें खोज निकाला। पुलिस ने तीनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस तृतीय वर्ष के पांच छात्र शनिवार दोपहर कछला गंगाघाट पर नहाते समय बह गए थे। इनमें गोरखपुर के प्रमोद यादव और राजस्थान के भरतपुर में रहने वाले अंकुश को गोताखोरों ने तुरंत बचा लिया था लेकिन पवन यादव, नवीन सेंगर और जय मौर्य का पता नहीं चला था।

घटना की सूचना पर डीएम मनोज कुमार और एसएसपी डॉ. ओपी सिंह करीब एक घंटे बाद कछला घाट पर पहुंचे और स्थानीय गोताखोरों से उनकी तलाश कराई लेकिन इन गोताखोरों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। वे केवल गंगा में डुबकी लगाकर छात्रों की तलाश कर रहे थे।

देर रात तक चला था सर्च अभियान :‌- उन्होंने कांटा और जाल डालकर भी उन्हें तलाश करने की कोशिश की थी। शाम करीब सात बजे अमरोहा से एसडीआरफ की टीम मौके पर पहुंची। अंधेरा होने की वजह से टीम ने जेनरेटर की मदद से देर रात तक सर्च अभियान चलाया लेकिन अंधेरा ज्यादा होने के बाद कारण रोक दिया। रविवार सुबह फिर से एसडीआरएफ ने स्थानीय गोताखोरों और पुलिस के सहयोग से अभियान चलाया। दोपहर करीब 12 बजे पहले जय मौर्य का शव मिला। वह जौनपुर के सराय थाना क्षेत्र के गांव परसनी का रहने वाला था। साढ़े 12 बजे बलिया के थाना पगड़ी क्षेत्र के गांव दोगराह निवासी पवन यादव पुत्र जयप्रकाश का शव मिला। इसके आधे घंटा बाद हाथरस की टीचर्स कॉलोनी में रहने वाले नवीन सेंगर पुत्र गंधर्व सिंह का शव मिला। इस दौरान तीनों छात्रों के परिवार वाले, एडीएम प्रशासन विजय कुमार सिंह, एसपी सिटी अमित किशोर श्रीवास्तव, तहसीलदार करनवीर सिंह और राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

शव का पोस्टमार्टम कराना नहीं चाहते थे जय मौर्य के परिजन:- रविवार दोपहर सबसे पहले जय मौर्य का ही शव गंगा से निकाला गया था लेकिन उसके परिवार वाले पोस्टमार्टम कराना नहीं चाहते थे। वह इस संबंध में एडीएम विजय कुमार से भी मिले। एडीएम ने बताया कि यह कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत पोस्टमार्टम कराना पड़ेगा। उन्होंने परिवार वालों को समझाया तो वह मान गए।

 

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