देवभूमि (उत्तराखंड)

केंद्र सरकार कर रही जोशीमठ को संकट से बचने के लिए बड़ी प्लानिंग

Central government is doing big planning to save Joshimath from crisis

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमे आपको बतादें कि जोशीमठ संकट से पहाड़ों में दहशत का आलम है. सड़क से लेकर घरों तक में दरारें आने की वजह से मकान और व्‍यवसायिक प्रतिष्‍ठनों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. इन दरारों से पानी भी निकलने लगा है, जिससे ऐसे मकानों में रहना मुश्किल हो गया.

आपको बताते चले कि खतरनाक हो चुके ऐसी इमारतों को ढहाने का काम भी शुरू कर दिया गया है. इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर जोशीमठ में अचानक से चौड़ी-चौड़ी दरारें क्‍यों फटने लगीं। भविष्‍य में जोशीमठ को ऐसे संकट से कैसे बचाया जा सकता है.

आपको बतादें कि समय रहते लोगों को सुरक्षित स्‍थानों तक पहुंचाया जा सकता है? मौजूदा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने जोशीमठ में माइक्रो सिस्‍मिक ऑब्‍जर्वेटरी लगाने का फैसला किया है, ताकि छोटी से छोटी भूकंप की घटना पर नजर रखी जा सके और उसके आधार पर उसके असर का विश्‍लेषण किया जा सके.

हालाँकि जोशीमठ भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक जोन-5 में आता है. इसका मतलब यह है कि इस क्षेत्र में अक्‍सर भूकंप के झटके आते रहते हैं. आमतौर पर उस कंपन को लोग महसूस नहीं कर पाते हैं, लेकिन पहाड़ों और चट्टानों पर इसका व्‍यापक असर पड़ता है. इससे तनाव पैदा होता है. धीरे-धीरे इस तरह की घटनाएं बढ़ने से प्रभावित क्षेत्रों में इस तनाव की वजह से दरारें फट जाती हैं.

पूर्व में मिली जानकारी के अनुसार इस तरह की समस्‍या से निपटने में काफी मदद मिल सकती है. वहीँ केंद्र सरकार बुधवार (11 जनवरी 2023) को जोशीमठ में माइक्रो सिस्मिक वेधशाला इंस्‍टॉल करेगी. पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकार‍ियों ने बताया कि इससे भू-विज्ञानियों को क्षेत्र का निरीक्षण करने में मदद मिलेगी. विश्‍लेषण के आधार पर क्षेत्र में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सुरक्षित तरीके से विकास करने में सहायता मिलेगी.

आपको बतादें कि जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में लगातार भूकंप संबंधी गतिविधियां होती रहती हैं. इससे चट्टानें कमजोर होती जाती हैं. इससे दरारें उभर आती हैं. इसके बाद ज्‍यादा बारिश होने की वजह से पहाड़ों से आने वाला पानी इन दरारों में भरता जाता है. ऐसे में इन चट्टानों के गिरने की आशंका भी बढ़ जाती है.

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