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शोधकर्ताओं ने योग के आसनों के प्रदर्शन की सटीकता की मात्रा निर्धारित करने और उसे मापने की गणितीय विधि विकसित की

by AMAN KUMAR SIDDHU
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शोधकर्ताओं ने स्थिरता और संतुलन के संदर्भ में योग के आसनों के प्रदर्शन की सटीकताकी मात्रा निर्धारित करने और उसे मापने की एक नई गणितीय विधि विकसित की है।

इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी) पर आधारित यह गणितीय विधि एक ऐसी नैदानिक ​​प्रक्रिया है जो मांसपेशियों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करती है, प्रदर्शन की सटीकता का आकलन करने में मदद कर सकती है और उसमें उपयुक्त सुधार लाने का मार्ग प्रशस्त करती है। औरइस प्रकार, वह योग का अभ्यास करने वालों को विभिन्न आसनों से अधिकतम लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।

रमैया मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमेश डी.वी. के साथ मिलकर डॉ. एस. एन. ओंकार के नेतृत्व में किये गये इस शोध कार्य ने योग के आसनों को करते समय स्थानिक और सामयिक घटकों के संदर्भ में मांसपेशियों के व्यवहार और प्रदर्शन को समझने के लिए एक उपचार के रूप में योग पर ध्यान केन्द्रित किया। शोधकर्ताओं ने ईएमजी का उपयोग भौतिक और शारीरिक, दोनों, मापदंडों का अध्ययन करने के लिए किया।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागके ‘योग और ध्यान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (सत्यम)’ कार्यक्रम के समर्थन से किए गए इस अध्ययन ने बैंगलोर स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी)के बायोमैकेनिक्स लैब में 2 साल तक 21 से लेकर 60 वर्ष तक की आयु वालेपुरुष और महिला सहित 60 स्वस्थ प्रतिभागियों का आकलन किया। लगभग 110 सेकंड की अवधि केआंकड़ेइकट्ठे किये गये और प्रतिभागी सामान्य रूप से सांस लेते हुए और शांत मन के साथ 20 सेकंड के लिए योग के अपने आसन की अंतिम स्थिति में रहे। यही प्रक्रिया त्रिकोणासन, वृक्षासन, वीरभद्रासन-1, वीरभद्रासन-2, वीरभद्रासन-3, पार्श्वकोणासन जैसे योग केविभिन्न आसनों के लिए अपनाई गई। पीठ दर्द, कंधे या गर्दन की चोटों के इतिहास वाले प्रतिभागियों को इस अध्ययन से बाहर रखा गया था। इस शोध को’इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योगा’ में प्रकाशित किया गया है।

डॉ. ओंकार के अनुसार, यह गणितीय विधि योग का प्रदर्शन करने वाले व्यक्ति को इसे संपूर्णता के साथ करने में मदद कर सकती है। यह विधि लक्षित मांसपेशियों की एक स्पष्ट तस्वीर भी पेश करती है और योग का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को मांसपेशियों की गतिविधि के संदर्भ में योग की मुद्राओं की स्थिरता के बारे में एक अंतर्दृष्टि देती है। योग का अभ्यास करने वाला व्यक्ति इस फीडबैक के साथ अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकता है और योग करते समय मन से लेकर मांसपेशियों तक से जुड़ाव बनाए रख सकता है।

यह अध्ययन योग की यांत्रिकी के बारे में बायोमेकेनिकल के साथ-साथ मोटर नियंत्रण के दृष्टिकोण से जुड़ी समझ भी प्रदान करता है, जोकि इस क्षेत्र में भविष्य के अनुसंधान के लिए एक आधारभूत ढांचा तैयार करने में सफल रहा।

प्रकाशन संबंधी विवरण:

देवराजू वी., अशिता बी. आर., क्षमिथ अल्वा के., रमेश देबर वी., एस. एन. ओंकार, ‘योगासन के दौरान मांसपेशियों के कार्यों के इलेक्ट्रोमायोग्राफी विश्लेषण की एक गणितीय विधि’, इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योगा 

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