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स्याना में जिलाअधिकारी ने नीमनदी किनारे पर पुनर्जीवन हेतु पीपल व पाकड का वृक्षारोपण किया

by AMAN KUMAR SIDDHU
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कृष्णा जी समर इडिया पत्रकार ब्यूरोचीफ बुलन्दशहर

बुलन्दशहर
स्याना तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत गांव नयाबांस में नीम नदी के पुनर्जीवन एवं जीर्णोद्वार के लिए जिला प्रशासन एवं नीर फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी रविन्द्र ने नीम नदी के किनारे पीपल एवं पाकड़ का पौधा रोपते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नीम नदी के पुनर्जीवन एवं जीर्णोद्वार में जिलाधिकारी महोदय एवं अधिकारियों तथा उपस्थित सामान्य द्वारा नदी की भूमि में खुदाई कार्य करते हुए श्रमदान भी किया गया। इस अवसर पर नीम नदी के पुनर्जीवन हेतु स्थानीय निवासियों से भी श्रमदान करते हुए नदी का जीर्णोद्वार करने की अपील की गई।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि नीम नदी जिस प्रकार से पूर्व के वर्षो में कल-कल करती हुई बहती थी उसी प्रकार से आज के समय में नदी को बहने के लिए उसको पुनजीवित किया जाना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नीम नदी का उद्गम हापुड़ जनपद के गांव दतियाना से होते हुए जनपद बुलन्दशहर में लगभग 94 किमी0 की लंबाई में तहसील स्याना, अनूपशहर एवं डिबाई से गुजरते हुए जनपद कासगंज में काली नदी में जाकर मिलती है। गंगा की सहायक नदियों को साफ किया जाना अति आवश्यक है जिससे गंगा में स्वच्छ जल जाए, इसके लिए नीर फाउन्डेशन द्वारा नदियों के लिए किये जा रहे जीर्णोद्वार कार्य की सराहना की गई। नीम नदी के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए वर्षा से पूर्व नदी का चैड़ीकरण/सौन्दर्यीकरण कार्य कराया जाये जिससे जल का प्रवाह को निर्बाध रूप से बहें।

उप जिलाधिकारी सुभाष सिंह स्याना को निर्देशित किया गया कि नीम नदी की भूमि की खतौनी के आधार पर पैमाइश कराते हुए पटरी का चिन्हांकन करते हुए अवैध कब्जों को हटवाया जाये। साथ ही बीडीओ को निर्देशित किया गया कि नीम नदी के दोनों किनारों की पटरी पर मनरेगा के अन्तर्गत ट्रेंच खुदाई एवं पौधारोपण का कार्य कराते हुए नदी की भूमि को सुरक्षित किया जाये। नदी किनारे के गांव में जनजागरूकता अभियान चलाते हुए नदी के जल को स्वच्छ एवं अविरल बनाये रखने के लिए इसमें कूड़ा-करकट, पाॅलिथिन एवं गंदे पानी को न डाले जाने के लिए जागरूक किया जाये। नदी के आस-पास खेती करने वाले किसानों से भी अपील लेमनग्रास, खस, बांस, सहजन, हल्दी की फसलों को उगायें जाने से आय दुगुनी होने के साथ ही पानी का वाटर रिचार्ज भी होगा। नदी किनारे फलदार पेड़ लगाये जाने से फल भी प्राप्त होंगे तथा वाटर रिचार्ज होने से पानी की भी कोई समस्या नहीं रहेगी। नदी किनारे गांवों में तालाबों का जीर्णोद्वार करने के कार्यो को कराया जाये। जिलाधिकारी द्वारा नदी एवं जल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उसके प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभों के बारे में भी विस्तृत रूप से जानकारी दी

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