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गंगा खादर क्षेत्र में दुर्लभ जंतुओं पर गहराता रहा है संकट

by AMAN KUMAR SIDDHU
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स्याना गंगा खादर क्षेत्र में दुर्लभ जंतुओं पर गहराता रहा है संकट
गंगाखादर में दुर्लभ जीव जंतुओं के मिलते रहे है शव

कृष्णा जी समर इडिया पत्रकार ब्यूरोचीफ बुलन्दशहर

कार्यवाई के अभाव में शिकारियों के हौसले बुलंद

बुलंदशहर
स्याना तहसील क्षेत्र में
बुगरासी गंगा को गंदगी से बचाने वाले जीव-जंतुओं के लिये कभी सुरक्षित माने जाने वाला रामसर साइट अब महफूज नही रहा। सबंधित जिम्मेदारों की नजर में यह कुदरती, बीमारी अथवा अज्ञात मौंत का कारण हो सकता है लेकिन सच्चाई यहीं है कि गंगा खादर में बारह सिंगहा के खरगोश आदि के शिकारियों ने हत्या किये जाने, वन भूमि पर आगजनी, अन्य कारणों से अजगर व हिरन लीलगाह आदि की मौंत के मामलों में कार्यवाई न होना विभाग की लापरवाही साबित करने के लिए काफी है
गंगा व खादर में दुर्लभ प्रजाति के कछुए, मछलियां, पक्षियों, दुर्लभ हिरन, सीही आदि के शिकार पर काबू पाने का इंतजाम नही है। वन चौकीदारों की कई बार भूमिका संदिग्ध रही है, पूर्व में भी होते रहे हैं नरसेना थाना के अंतर्गत गांव बसी बांगर में दुर्लभ प्रजाति के हिरन को शिकारियों ने हत्या कर दी थी,

डाल्फिन के अवशेष मिलने पर कोई कार्रवाई प्रकाश में नही आ सकी। और अब से 4 माह पूर्व निजामपुर बांगर में भी दुर्लभ प्रजातियों के बारहसींगा के शव मिले थे, अनूपशहर में 9 वर्ष पूर्व मादा घडिय़ाल का शव मिला था। सबंधित अधिकारी कभी शिकायत के अभाव में तो कभी किसी अन्य कारणों से शिकार पर शिकंजा नही कस पाते। रात-दिन बुग्गियों द्वारा गंगा से हो रहे बालू खनन पर सब मौन रहते है, जबकि इन रेत के टापूओं पर कछुआ व घडिय़ाल अंडे रखते है। पर्यावरण चौधरी मुनेदर सिंह प्रेमी अनिल चौधरी, भूपेंद्र सिंह, मुजीब खान बसींबाँगर , कमल सिंह, दिनेश, देवीराम आदि ने चिंता व्यक्त करते हुए इन घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने को ठोस कदम उठाये जाने की बात कही।

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