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चुनावी मतगणना के दौरान कोरोना से मौत हुई शिक्षकों के परिवार को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए

by AMAN KUMAR SIDDHU
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रिपोर्ट रोहित कुमार अमरोहा

अमरोहा अमरोहा जनपद के प्राथमिक शिक्षक संघ के समस्त पदाधिकारियों ने चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोनावायरस में संक्रमित हुए शिक्षक जिनकी मौत हो चुकी है। उनके परिवार को आर्थिक सहायता के लिए संगठन आगे आया है। जिसको लेकर कहां है कि चुनावी ड्यूटी करने के पश्चात जनपद अमरोहा में 21 शिक्षक शिक्षामित्र, अनुदेशक, चतुर्थी कर्मचारी विपिन कोरोना संक्रमण के कारण असमय मृत्यु हो गई है। उनके परिवार से पालन पोषण करने वाले से परिवार टूट चुका है। जिसके कारण परिजनों का रो-रोकर कर बुरा हाल हो गया है। जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। आश्रित परिवार उस समय सरकार की तरफ से आस लगाए बैठे हैं। कि सरकार के द्वारा जो घोषणा की है। उसका शासनादेश जारी रख दे। तो परिवार का पालन पोषण चल सके।
इस संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा चुनाव आयोग सरकार एवं विभाग को अपने पत्र के माध्यम से मृत्यु की सूची एवं मांग पत्र भेज दिया है। और शासनादेश की मांग करता है। संगठन द्वारा सरकार से कई मांगे की गई हैं।


समस्त परिवारों को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए करोड़ों के मुआवजे को माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने भी उचित माना है।
सभी मृतक शिक्षकों के ऐसे आश्रितों को जो b.Ed, बीटीसी, सीआईडी, की योग्यता रखते हैं। उन्हें टीईटी छूट देकर शिक्षक की नौकरी और केवल इंटरमीडिएट या स्नातक की योग्यता रखते हो उन्हें लिपिक की नौकरी की दी जाए।
मृतक शिक्षकों के परिवारों को 1 अप्रैल सन 2005 से पहले लागू पेंशन के अंतर्गत पारिवारिक पेंशन दी जाए। और एनपीएस खाते में संपूर्ण धनराशि मृतक के आश्रित को दी जाए।
ऐसे सभी मृतक सिरसा जो 60 वर्ष है। अथवा से कम उम्र के थे। उनके परिवार को शासनादेश के अनुसार 20 की धनराशि प्रदान की जाए।
सभी मृतक एवं कार्यरत शिक्षकों को कोरना योद्धा घोषित किया जाए करो ना सागर में से इलाज सरकार ठीक हुए शिक्षकों शिक्षामित्रों अनुदेश को कर्मचारियों से इलाज करवाया जाए। पंचायत चुनाव में मतदाता मतगणना से उपस्थित सभी बीमार शिक्षक कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही हटाई जाए। मृतक शिक्षक अनुदेशक कर्मचारियों विशेष शिक्षकों को नौकरी दी जाए शिक्षकों के आधार अधिनियम के विपरीत में शिक्षक कार्य ना कराया जाए। अन्य कार्यों में लगी ड्यूटी हटाई जाए। इस दौरान सभी शिक्षकों ने अपनी मांगों को रखा और उन्हें पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाए।

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