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त्रिपुरा में PM मोदी: महामिलावट के साथी भी जान चुके हैं कि देश का भविष्य मोदी के साथ ही है

by chalunews
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लोकसभा चुनावों की घोषणा होने में करीब एक महीने का वक्त बाकी है लेकिन बीजेपी ने फरवरी की शुरुआत से ही अपनी चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार 8 फरवरी को सबसे पहले छत्तीसगढ़ का दौरा किया जहां उन्होंने रायगढ़ के कोंडातराई में एक रैली को संबोधित किया. वहां मोदी ने कांग्रेस की नई सरकार की तरफ से किसानों की कर्जमाफी को एक छलावा बताया. इसके बाद मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे और जलपाईगुडी में रैली की. मोदी की कोशिश बंगाल में पार्टी को मजबूत करने की है. पार्टी चाहती है कि 2019 चुनाव में वह ज्यादा से ज्यादा सीटें जीत सके. ममता के गढ़ में घुसकर मोदी का ललकारना यही दिखा रहा है कि बीजेपी बंगाल की जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश में है कि अब ममता का विकल्प कांग्रेस और लेफ्ट नहीं बल्कि बीजेपी ही है, जिसका एहसास पंचायत चुनावों में हो चुका है.

लेकिन, पश्चिम बंगाल के अलावा मोदी की नजर बाकी उन राज्यों पर भी है जहां बीजेपी काफी उम्मीद लगाए बैठी है. बीजेपी की कोशिश नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण के राज्यों के अपनी सीटें बढ़ाने की है. लिहाजा मोदी आज पश्चिम बंगाल में रैली खत्म कर के सीधे असम पहुंच गए हैं. आज रात वो वहीं विश्राम करेंगे.

पूर्वोत्तर राज्यों की 21 सीटें जीतने का लक्ष्य

अगले दिन शनिवार 9 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम की राजधानी गुवाहाटी में ब्रम्हपुत्र नदी पर एक पुल की आधारशिला रखने के बाद एम्स का शिलान्यास भी करने वाले हैं. इसके बाद नई गैस पाईपलाइन का उद्घाटन भी करेंगे. असम के बाद प्रधानमंत्री मोदी का अरुणाचल प्रदेश में दौरा होगा, जहां वो एक नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का उद्घाटन कर राज्य के लोगों को नई सौगात देंगे. इसके बाद शाम को मोदी त्रिपुरा में एक बड़ी रैली को संबोधित करेंगे. कुल मिलाकर प्रधानमंत्री कल उत्तर पूर्वी राज्यों का बैक-टू बैक दौरा करने वाले हैं.

पूर्वोत्तर के राज्यों में कुल 25 लोकसभा सीटें हैं. इनमें से 8 सीटें बीजेपी के पास है. अब बीजेपी का लक्ष्य है कि आगामी लोकसभा चुनाव में वह पूर्वोत्तर राज्यों की 21 सीटें जीत सके.

पूर्वोतर के राज्यों में सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर, मेघालय में बीजेपी की सरकार है. जबकि त्रिपुरा में पार्टी ने अपने दम पर लेफ्ट के मजबूत किले को ध्वस्त कर दिया. केवल मिजोरम में बीजेपी अपनी सरकार नहीं बना सकी. हालांकि यह पहली बार था जब बीजेपी ने राज्य में अपना खाता खोला.

प्रधानमंत्री मोदी के बैक टू बैक दौरों का मकसद चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं के भीतर उर्जा का संचार करना है. मोदी पूरी तरह से चुनावी मोड में हैं.

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