परिवार दिवस पर विशेष छोटे होते परिवारों की बढ़ रही समस्याएं संयुक्त परिवार में रहकर ही मिलती हैं खुशियां

परिवार दिवस पर विशेष छोटे होते परिवारों की बढ़ रही समस्याएं संयुक्त परिवार में रहकर ही मिलती हैं खुशियां

परिवार दिवस पर विशेष

छोटे होते परिवारों की बढ़ रही समस्याएं

संयुक्त परिवार में रहकर ही मिलती हैं खुशियां

समर इंडिया अंकुर त्यागी
अमरोहा: संयुक्त राष्ट्र संघ ने 15 मई 1993 को अन्तरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाने की घोषणा की थी। तभी से प्रत्येक वर्ष इसी तारीख को विश्व परिवार दिवस के रूप में मनाया जाता है। हांलाकि परिवार को संयुक्त बनाए रखना परिवार के मुखिया के लिए बहुत बड़ी चुनौती रहती है।

 

 

सारी दुनिया में वसुदेव कुटुंबकम का उद्घोष करने वाले भारत में ही परिवार को एक साथ बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। परिवार दिवस को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मनाते हुए 22 साल हो चुके हैं, लेकिन परिवार की अहमियत दिन ब दिन कम होती जा रही है। परिवार दिवस आता है और अपने आने का अहसास कराए बिना ही चला जाता है। एक समय था जब एक ही छत के नीचे दादा−दादी, ताउ−ताई, चाचा−चाची और भाई बहनों से भरा पूरा परिवार रहता था। आज उसकी जगह एकल परिवार ने ले ली है। चार विवाहित जोड़े एक घर में रहने वाले परिवारों की संख्या तो अब न के बराबर ही रह गई है। एक ही छत के नीचे तीन−चार भाइयों के रहने की बात करना तो दूर की बात हो गई है।

 

 

बड़े शहरों की गगनचुंबी इमारतों में परस्पर संवाद तो दूर की बात है। एक ही परिसर में रहने वाले लोगों को पता नहीं होता कि वहां कौन−कौन लोग रह रहे हैं। कौन आ रहा है कौन जा रहा है। जब कोई बड़ी घटना घट जाती है तो उसका भी पता मीडिया के द्वारा ही चलता है। यह हमारे सामाजिक ताने−बाने की स्थिति होती जा रही है। एक वह भी जमाना था, जब स्कूल की गर्मियों की छुटि्टयां होते ही बच्चे गांव में दादा−दादी और नाना−नानी के पास रहने आ जाया करते थे। परिवार के साथ रहने से बच्चे संस्कार आते थे और वह पारिवारिक रिश्तों की महत्ता को समझते थे।

 

हांलाकि हमारे देश में आज भी अनगिनत ऐसे परिवार हैं जो संयुक्त रूप से एक साथ मिल जुल कर रह रहे हैं। ज्ञात रहे कि संयुक्त परिवार का अपना एक अलग ही मजा है। जिसमें हमारे दादा दादी चाचा चाची भाई बहिन सब एक साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं और मिल जुल कर एक साथ भोजन भी करते हैं। परिवार पर आई मुसीबत का सामना भी सब मिलकर करते हैं जिससे मुसीबतों का पता भी नहीं चलता। हम सब देशवासी इस परिवार दिवस पर ये संकल्प लें कि हम अपने परिवार के साथ मिलकर रहेंगे।

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