क्लोन की बेवसाइट से बनाये जा रहे प्रमाण पत्र, बिसौली में शिकायत।

क्लोन की बेवसाइट से बनाये जा रहे प्रमाण पत्र, बिसौली में शिकायत।

क्लोन की बेवसाइट से बनाये जा रहे प्रमाण पत्र, बिसौली में शिकायत।

जयकिशन सैनी
समर इंडिया (बदायूँ)
बदायूँ। फर्जी प्रमाण पत्र मामले में अलापुर पुलिस की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह यह है कि यह नेटवर्क पूरे जिले में ही फैला हुआ है। जिसे तोड़ने के लिये अलापुर पुलिस के साथ ही अब सर्विलांस टीमें भी एक्टिव हो गयी है। पुलिस को कई अहम जानकारी हाथ लगी हैं।

 

 

 

 

जिसमें प्रमाण पत्र बनाने वाली सीआरएस (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) नाम की कंपनी की वेबसाइट की एक क्लोन वेबसाइट बनाकर फर्जी प्रमाण पत्र बनाने की जानकारी भी मिली है। म्याऊं का राहुल और उसावां का आनंद दोनों इसी तरह से फर्जीवाड़ा करने वालों के लिये एक एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। जिससे की नेटवर्क को तोड़ा जा सके। इधर, बिसौली सीएचसी के एमओआईसी ने भी सीएमओ को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।

 

 

बिसौली एमओआइसी ने भी की शिकायत
बिसौली एमओआइसी ने भी क्षेत्र के कुछ जनसेवा केंद्र संचालकों पर फर्जी तरह से जन्मप्रमाण पत्र बनाये जाने की आशंका को लेकर सीएमओ को पत्र दिया है। जिसमें उन्होंने सीएचसी क्षेत्र में कई जनसेवा केंद्रों पर फर्जी तरह से प्रमाण पत्र बनाए जाने की बात कहते हुये कार्रवाई कराये जाने की मांग की है। कयास लगाये है कि फर्जी प्रमाण पत्रों का जाल अलापुर, म्याऊं और उसावां में ही नहीं बल्कि पूरे जिले में फैला हुआ है।

बे

 

का

क्लोन बनाकर बनाये जा रहे थे प्रमाण पत्र जनसेवा केंद्रों पर बनाये जा रहे फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की जानकारी मिलने के बाद से ही पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने पहले म्याऊं से राहुल सिंह को पकड़ा बाद में उसावां के आनंद गुप्ता पुलिस के हाथ लगे। दोनों से अहम जानकारी मिलने के बाद अब बताते हैं कि पुलिस ने जगत से भी एक युवक को उठाया है। जिससे पूछताछ की जा रही है। जिसमें जांच में पता चला कि है। कि प्रमाण पत्र फर्जी तरह से ही बनाए जा रहे थे।

 

 

अब तक इन दोनों युवकों से 75 से अधिक प्रमाण पत्र बनाए जाने की पुष्टि हो चुकी है। जो उनके लैपटाप और मोबाइल से बरामद हुये हैं। एमओआइसी और अधिक प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात कह रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में जांच की तो पता चला कि सीआरएस (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) नाम की कंपनी की वेबसाइट की एक क्लोन वेबसाइट बनाकर प्रमाण पत्र बनाये जा रहे थे। पुलिस को मिले कई मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया गया है। जिससे कुछ जानकारी मिल सके।

Related Articles

Back to top button
E-Paper